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पुलिस परिवार के बाद विधायक सत्यनारायण शर्मा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लिखा पत्र..

  • “पुलिस आंदोलन सूत्रधार राकेश यादव,को पुलिस सुधार सलाहकार नियुक्त करने की मांग,पुलिस परिवार के बाद विधायक सत्यनारायण शर्मा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लिखा पत्र”

आंदोलन के समय जब विधानसभा चुनाव  में पुलिस सुधार की मांग को अपने चुनावी मेनिफेस्टो में शामिल करते हुए,सरकार बनने पर सभी मांगों को मानने का वायदा किया था। 

पुलिस सुधार के अंतर्गत आंदोलनकारी पुलिस परिवार की मांगे यह थी,कि पुलिस कर्मियों को वीकली ऑफ दिया जाए इसके अलावा.राज्य के सभी तृतीय वर्ग के पुलिस कर्मचारियों के वेतन एवं भत्ते केंद्र सरकार के तृतीय वर्ग कर्मचारियों के समान हो।  राज्य के सभी तृतीय वर्ग पुलिस कर्मचारियों के आवास की समुचित ब्यवस्था उपलब्ध बल के अनुरूप की जाए। शासकीय कार्य हेतु वर्तमान में सायकल भत्ता दिया जा रहा हूं उसे पेट्रोल भत्ता करते हुए कम से कम 2 हजार रुपये दिया जाए। पुलिस किट व्यवस्था को मध्यप्रदेश की तरह बंद कर किट भत्ता मिले। ड्यूटी के दौरान मरने वाले कर्मचारी को शहीद का दर्जा देते हुए मध्यप्रदेश की तरह 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि व परिवार के एक सदस्य को अनुकम्पा नियुक्ति दी जाए। अन्य विभागों की तरह राज्य के तृतीय वर्ग पुलिस  कर्मचारियों के परिवार के मुफ्त इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए अन्य विभागों की तरह पुलिस के ड्यूटी करने का समय 8 घंटे निर्धारित किया जाए और निर्धारित समय से ज्यादा कार्य लेने पर ओवर टाइम भुगतान दिया जाए।.नक्सल प्रभावित जिलों में तैनात बल को उच्च मानक के सुरक्षा उपकरण जैसे बुलेट प्रूफ जैकेट व अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। दस वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके सिपाहियों को विभागीय प्रमोशन का लाभ दिया जाए।

इधर प्रदेश में कांग्रेस सरकार के आते ही चन्द दिनों के सरकार ने पुलिस परिवार की पहली मांग साप्ताहिक अवकाश को मानते हुए उसे राज्य में लागू कर दिया  था। शेष मांगो पर विचार करने के लिए सलाहकार समिति का गठन करने की बात समाने आ रही है।। इधर राज्य भर के पुलिस परिवार की  मांग है कि सरकार समिती बनाने के बजाए  राकेश यादव को पुलिस सुधार का सलाहकार नियुक्त करे। 

सलाहकार की नियुक्ति को लेकर विधायक सत्यनारायण शर्मा ने मुखिया के नाम लिखा पत्र……

 पुलिस परिवार के अलावा रायपुर ग्रामीण से विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सत्यनरायण शर्मा ने भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम पत्र लिख कर पुलिस सुधार के सलाहकार के रूप राकेश यादव की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा है।। उनकी नियुक्ति का आधार बताते हुए विधायक शर्मा ने मुखिया को लिखा है कि राकेश यादव पुलिस विभाग में 13 साल की लम्बी सेवा का अनुभव रखते है। उन्होंने अपने जीवन का सात वर्ष राज्य भर में पुलिस जवानों के हित की लड़ाई में होम किया है।। वे राज्य भर के पुलिस जवानों की छोटी-छोटी किंतु महत्वपूर्ण समश्याओं को भली-भांति जानते है।। इनमे से कई ऐसी समश्याएँ है जो महज एक या दो फोन कॉल पर ही ठीक की जा सकती है।। अतः राज्य सरकार यथाशीघ्र पुलिस जवानों की समश्याओं के निराकरण हेतु “एक 24×7 हेल्पलाइन”की शुरुवात करे, जिसमें सलाहकार के पद में राकेश यादव की नियुक्ति किया जाए। क्योंकि हम देख रहे हैं कि आये दिन हमारे पुलिस के जवान इन्हीं छोटी-छोटी समश्याओं से जूझते हुए बड़ी संख्या में आत्म हत्याएं कर रहें है।। इस दुःखद वृत्ति को यहीं रोका जाना बेहद जरुरी है।। *जबकि विधायक शर्मा पत्र पर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आश्वस्त किया है कि पुलिस सुधार को अगली केबीनेट बैठक(विधानसभा सत्र) में जरूर रखेंगे।

जबकि इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार एवं महासचिव पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव कमल शुक्ला का साफ तौर पर कहना है कि सरकार के पास पर्याप्त विधायकों की संख्या है,ऊपर से कांग्रेस ने पुलिस सुधार की मांग को चुनावी मेनिफेस्टो में शामिल किया था। अब अगर सरकार की नीयत साफ हो तो पुलिस सुधार  या पत्रकार सुरक्षा कानून को बिना केबिनेट के भी राज्य में लागू करवा सकती है।। सरकार के पास विशेषाधिकार की क्षमता है और आप ऐसा कुछ नही कर रहे हैं जिसका विरोध विपक्ष के विधायक करेंगे.

◆ज्ञात होगा कि वर्ष 2017/18 में तत्कालीन छ ग सरकार के विरुद्ध वृहद पुलिस आंदोलन के सूत्रधार बर्खास्त पुलिस कांस्टेबल राकेश यादव को राज्य में नई कांग्रेस सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद से ही पुलिस सुधार हेतु शासन की तरफ से सलाहकार नियुक्त किए जाने की मांग तेज होने लगी है।

 

 

गौरतलब हो कि राकेश यादव ने पुलिस आंदोलन के माध्यम से पुलिस सुधार के लिए लम्बा संघर्ष किया है।।

हममें से बहुतों को ध्यान होगा कि उनके नेतृत्व में किया गया पुलिस परिवार आंदोलन न प्रदेश की तत्कालीन भाजपा(रमन) सरकार के लिए काफी मुसीबतें खड़ी कर दी थी।

आपको बता दें कि इस आंदोलन को दबाने के लिए रमन सरकार के इशारों पर न केवल उन पर राष्ट्रद्रोह का झूठा आरोप लगा कर उन्हें गिरफ्तारी के बाद जेल भेजा गया था। बल्कि पुलिस सुधार की मांग करने वाले परिजनों को राजधानी रायपुर के अलावा पूरे प्रदेश भाजपा सरकार ने बुरी तरह से प्रताड़ित किया था।

इस तरह भाजपा सरकार के विरुद्ध पुलिस परिवार के जबरदस्त विरोध के माहौल को तबकी विपक्षी कांग्रेसियों ने चुनाव में बेहतर ढंग से भुनाकर सत्ता तक का सफर तय किया था।

 

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