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बोधघाट परियोजना से छत्तीसगढ़ का नहीं डूबेगा कोई गांव, प्रभावितो के लिए बनाई जाएगी पुनर्वास नीति राजस्व मंत्री

रायपुर– “बोधघाट परियोजना बस्तर क्षेत्र के लिए मिल का पत्थर साबित होगा। इस परियोजना से बस्तर के लाखो हेक्टेयर कृषि जमीनों के सिचाई होगी तो मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा, यह परियोजना बस्तर के विकास और समृद्धि के लिए है।” ये कहना है प्रदेश के राजस्व मंत्री जयसिंग अग्रवाल का। राजस्वमंत्री अग्रवाल ने कहा कि

“बोधघाट परियोजना का सीधा लाभ बस्तर क्षेत्र के रहवासियों को मिलेगा। यह पहली योजना होगी जिससे बस्तर क्षेत्र का कायाकल्प करेगी, अभी तक बस्तर के विकास के लिए अनेको योजनाए बनाई गई , वहा उद्योग लगाए गए पर उसका लाभ बस्तर को नहीं मिला। बोधघाट बस्तर के लिए मिल का पत्थर साबित होगा।”

श्री अग्रवाल ने कहा कि “हमारी सरकार ने विगत 40 वर्षो से रुके बोधघाट परियोजना को गति प्रदान किया है, इस परियोजना से 3 लाख 66 हजार हेक्टेयर में सिंचाई उपलब्ध होगा। इसमें दंतेवाड़ा जिले के 51, बीजापुर जिले के 218 तथा सुकमा के 90 इस प्रकार कुल 359 गांव लाभान्वित होंगे। इन तीनों जिलों में खरीफ में एक लाख 71 हजार 75 हेक्टेयर, रबी में एक लाख 31 हजार 75 हेक्टेयर तथा गर्मी में 64 हजार 430 हेक्टेयर इस प्रकार कुल 3 लाख 66 हजार 580 हेक्टेयर में सिंचाई होगी। वही सुकमा जिले के 90 गांवों के एक लाख हेक्टेयर रकबा में सिंचाई होगी। इस परियोजना से सुकमा जिले के सिंचाई रकबा 12.16 प्रतिशत से बढ़कर 68.81 प्रतिशत हो जाएगा। इस प्रकार जिले की खरीफ सिंचाई रकबा में 60.59 प्रतिशत की वृद्धि होगी।”

इस परियोजना से मत्स्य उत्पादन का बड़ा जलक्षेत्र उपलब्ध होगा, जिससे प्रतिवर्ष 4824 टन मत्स्य उत्पादन होगा। इस परियोजना के निर्माण में 28 गांव पूर्ण रूप से तथा 14 गांव आंशिक रूप से डूबान में आएंगे, जिसमें सुकमा जिले के कोई भी गांव डूबान से प्रभावित नहीं हो रहा है। ‘सिंचाई में वृद्धि- राज्य की समृद्धि‘ के तहत राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत पेयजल, पर्यटन एवं नौका विहार आदि सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसमें लिफ्ट इरीगेशन को भी शामिल कर बस्तर के शेष जिलों को भी सिंचाई एवं निस्तार के लिए जल उपलब्ध कराया जाएगा। ज्ञातव्य है कि गोदावरी नदी की मुख्य सहायक नदी इंद्रावती छत्तीसगढ़ राज्य में कुल 264 किलोमीटर में प्रवाहित होती है। बहुउद्देशीय परियोजना कई उद्देश्यों की पूर्ति करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और बस्तर संभाग की महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजना इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट परियोजना दंतेवाड़ा जिले के गीदम विकासखण्ड के पर्यटन स्थल बारसुर के समीप बनायी जाना है।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि पुनर्वास एवं व्यवस्थापन की नीति लोगों से चर्चा कर तैयार की जाएगी। विस्थापितों को उनकी जमीन के बदले बेहतर जमीन, मकान के बदले बेहतर मकान दिए जाएंगे। हमारी यह कोशिश होगी कि इस प्रोजेक्ट के नहरों के किनारे की सरकारी जमीन प्रभावितों को मिले, ताकि वह खेती-किसानी बेहतर तरीके से कर सके।

 

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