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ईओडब्लू में शिकायतों का लगा अंबार, वर्षो से अधूरी जाँच,, भ्रष्टाचारियों पर नहीं कस रहा क़ानूनी शिकंजा!

 Theindipendent.com

रायपुर– सत्ता परिवर्तन के बाद बीते डेढ़ साल में लोकसेवको के भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराध की दर्जन भर से अधिक शिकायते सत्ताधारी के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओ द्वारा किया गया। जिसमे आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने अधिकतर मे मामलो जाँच शुरू नहीं की या जांच अभी तक अधूरी है। सरकार के डेढ़ साल के बीतने के बाद भ्रष्टाचार से जुड़े किसी भी व्यक्ति कार्यवाही नहीं हो पाई है।

विपक्ष में रहते कांग्रेस ने सरकार में आने पर भ्रष्टाचारियो पर कड़ी कार्यवाही का नारा बुलंद किया था पर डेढ़ साल बीतने के बाद अधिकतर मामले सिर्फ कागजों तक सीमित है।

पुनीत गुप्ता की शिकायत

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के दामाद डॉ पुनीत गुप्ता पर डीकेएस अस्पताल में सामग्री खरीदी में भ्रष्टाचार, दवा खरीदी में गड़बड़ी की शिकायत, कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ट के नेता डॉ राकेश गुप्ता ने विगत दो साल पहले ईओडब्लू में किलोभर दस्तावेजों के साथ किया था। दो साल गुजरने के बाद उक्त जाँच पूरी नही हो सकी है। इस पर डॉ राकेश गुप्ता ने कहा कि

बंडलों में दस्तावेज देने के बाद भी अधिकारी जांच नहीं करते। वर्षो से जाँच अधूरी है ऐसे में अधिकारियो को तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए। अगर दस्तावेज झूठे या कम लगते है तो भी हमें बताना चाहिए पर अधिकारी न तो कार्यवाही करते न ही कुछ बताते है।”

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डॉ रमन सिंह- अभिषेक सिंह की शिकायत

राजनांदगांव के पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष नवाज खान ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और उनके पूर्व सांसद बेटे अभिषेक सिंह की आय से अधिक सम्पति और चिटफंड घोटाले में सलिंप्तता को लेकर ईओडब्लू में आठ महीने शिकायत किया पहले किया था। आठ महीनो में जाँच कहा पहुंची और क्या कार्यवाही की गई शिकायतकर्ता को नहीं पता। इन आठ महीनो में शिकायतकर्ता नवाज खान का ईओडब्लू ने बयान तक नहीं लिया। ऐसे में नवाज खान ने कहा कि

“ईओडब्लू में में डॉ रमन और उनके पुत्र अभिषेक सिंह की शिकायत के बाद आज तक बया न लिया गया न ही कोई कार्यवाही हुई। मैंने आरटीआई से निकाले दस्तावेजों के साथ शिकायत किया पर कार्यवाही का अब तक अतापता नहीं है। “

 

अरुण बिसेन की पत्नी और हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष की शिकायत

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के पूर्व ओएसडी रहे अरुण बिसेन की पत्नी को गैर क़ानूनी तरीके से नौकरी देने, उन्हें लाखो रुपये महीने का वेतन भुगतान करने और हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी की सरकारी पैसो का गलत उपयोग करने को लेकर शिकायत किया। जिसमे शिकायत को सही पाया गया कि 25 लाख रुपये अरुण बिसेन की पत्नी को भुगतान किया गया। उसके आगे की कार्यवाही गोपनीय है, जो किसी को नहीं पता। वही हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष भुपेन्द्र सवन्नी पर जाँच की अनुमति ईओडब्ल्यू ने विभागीय सचिव से माँगा है। जो साल भर बाद भी नहीं मिला है जिसके चलते फाइल ठन्डे बस्ते में है। विकास तिवारी ने कहा कि

वर्षों से जमे अधिकारी ना कार्यवाही कर रहे ना ही किसी भ्रष्टाचारी को जेल भेज पा रहे है। जब जांच हो गई तो सीधे जेल भेजना चाहिए।”

 

108 के टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत

आपातकालीन मेडिकल सुविधा देने स्वास्थ्य विभाग ने 108 और 102 का टेंडर जारी किया था ,जिसमे टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली कंपनी को नियमो के विपरीत टेंडर दिया गया। जिसकी शिकायत पत्रकार उचित शर्मा ने महीनो पहले ईओडब्लू से किया था पर जब तक जाँच की दिशा तय नहीं हुई है। उचित शर्मा ने कहा कि

जिसकी शिकायत की जाती है उसके विभाग से अधिकारी अनुमति मंगाते है तो जाँच कहा होगी। उच्चाधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारीयो जांच हेतु अनुमति नहीं देते। अब प्रदेश में भष्टाचार सरकार के लिए कोई मुद्दा नहीं रह गया है।”

ईओडब्लू में ऐसे दर्जन भर से अधिक मामले पेंडिग है जिनकी जाँच हो तो बड़े अधिकारियो को जेल की हवा खानी पड़ जाएगी। वहीं विपक्ष में रहते कांग्रेस ने तत्कालीन बीजेपी पर भ्रष्टाचारियों को शह देने का आरोप लगाया था। वहीं अपनी ही सरकार में कांग्रेसी न्याय के तरस गए है।

 

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