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गार्बेज बैग की आड़ में पॉलीथिन और डिस्पोजल का निर्माण, अधिकारी ने कहा “नहीं है अनुमति” फिर भी चल रही पॉलीथिन फ़ैक्ट्री

रायपुर, 20 अगस्त-  प्रदेश में राज्य सरकार ने पॉलीथिन के उपयोग और उसके निर्माण पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगाया है उसके बाद भी राजधानी में धड़ल्ले निर्माण जारी है। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रो के साथ साथ रिहायशी इलाको में प्लांट संचालित हो रहा है।

राजधानी के आमानाका इलाके में संचालित खंडेलवाल प्लास्टिक फैक्ट्री में फारेस्ट बैग और गार्बेज बैग की आड़ में कंपनी द्वारा प्रतिबंधित पॉलीथिन का निर्माण निर्माण किया जा रहा है। फ़ैक्ट्री में गार्बेज बैग, फॉरेस्ट बैग, पोषण आहार की पैकेजिंग पॉलीथिनसहित प्रतिबंधित पॉलीथिन का निर्माण बड़े पैमाने पर जारी है। जानकारी पर पहुंची “द इंडिपेंडेंट” टीम ने कारखाने में दर्जनों मजदुर और महिलाओ को प्लास्टिक का निर्माण और उसकी पैकेजिंग करती मिली।

विभाग ने कहा- नहीं है अनुमति

आमानाका में संचालित फ़ैक्ट्री में प्रतिबंधित पॉलीथिन का निर्माण को लेकर पर्यावरण सरंक्षण मंडल अधिकारियो ने कहा कि खंडेलवाल प्लास्टिक इंडस्ट्रीज को पॉलीथिन निर्माण का अनुमति नहीं है। ऐसे में स्पष्ट है कि नियमो को दरकिनार करते हुए कारोबारी द्वारा प्लास्टिक और पॉलीथिन का निर्माण किया जा रहा है। जानकारीनुसार कारोबारी खंडेलवाल का गोलबाज़ार में दुकान भी है जहा से व्यापारियों को प्लास्टिक और पॉलीथिन सामग्री की आपूर्ति की जाती है।

सरकार ने लगाया प्रतिबंध-

राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में देश में बढ़ते प्रदुषण को देखते हुए हैंडल और नान हैंडल पॉलीथिन को बैन कर दिया था। सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद दर्जनों फैक्ट्रिया बंद हो गई तो कुछेक ने अपने काम बदल दिया। जारी नियमानुसार 51 माइक्रोकॉन से कम की सभी तरह की पॉलथिन हैंडल और नान हैंडल पॉलथिन को प्रतिबंधित किया गया था। सरकार ने ग्रीन ट्रिब्यून के दिशा निर्देशों के बाद के साल 2019 में नया नियम बनाया जिसमे प्लाटिक , सभी प्रकार के पॉलीथिन, डिस्पोजल, प्लास्टिक कप, चम्मच और फ्लेक्स को बैन किया गया था। उसके बाद भी प्रदेश में बड़े पैमाने पर पॉलथिन, डिस्पोजल ग्लास, प्लास्टिक कप का उपयोग किया जा रहा है। प्रतिबंधित पॉलीथिन के उत्पादन और विक्रय पर पर्यावरण सरंक्षण मंडल के क्षेत्रीय प्रबंधक़ एसके उपाध्याय ने कहा कि

” खंडेलवाल प्लास्टिक फैक्ट्री प्रतिबंधित पॉलीथिन के उत्पादन की जानकारी मिली है, टीम भेज कर जाँच कराई जाएगी।”

संचालक नितेश खंडेलवाल ने कहा कि

प्रतिबंधित पॉलीथिन का निर्माण नहीं किया जाता, अगर ऐसा है तो कुरकुरे और दूध की पॉलीथिन भी बंद हो जाती।”

 

EXCLUSIVE- फारेस्ट बैग की आड़ में प्रतिबंधित पॉलीथिन का निर्माण, सरकार ने लगाया प्रतिबन्ध फिर भी जारी पॉलीथिन का निर्माण,,

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