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कोरोना विशेष- मरीजों की कम संख्या पर खुश होती रही सरकार, उधर जमातियों ने कराई सरकार की फजीहत,, बड़ा सवाल कौन सही कोर्ट या मुख्यमंत्री?

राहुल गोस्वामी@द इंडिपेंडेंट.कॉम

रायपुर-   कोरोना संक्रमण के नियंत्रण पर प्रदेश सरकार की जितनी सरकार की जाए कम है। सरकार ने बेहद सधे अंदाज में इसके नियंत्रण के उपाय किये। सरकार की प्रभावी कार्यवाही का परिणाम था कि लगातार मरीज मिलने के बाद दसवा मरीज मिलने में चार दिनों का अंतर था। छत्तीसगढ़ के पडोसी राज्यों में स्थिति इसके ठीक उलट है। अन्य राज्यों में स्थिति भयावह होता रहा पर प्रदेश में बेहतर स्थिति रही। इस स्थिति में सरकार ने एक जगह चूक कर दी।

सरकार ने जमात और विदेश से लौटे लोगो को क्वारंटीन करने का निर्देश देकर भूल गई की उसका पालना हो रहा की नहीं। सरकार की यही चूक भरी पड़ गई और दनदनाते हुए मरीज की संख्या दस से अठारह पहुंच गई। सरकार मरीज की संख्या कम होते और सेहत में सुधार के बाद डिस्चार्ज होने से खुश होती रही, और होना भी चाहिए पर इतनी जल्दी नहीं। सरकार ने मौका देखकर केंद्र सरकार पर सहयोग नहीं करने का गंभीर आरोप लगाया और प्रदेश की स्थिति का पूरा श्रेय खुद लेने की कोशिश की और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल यही गलती कर गए। जबकि वक्त केंद्र सरकार पर आरोप लगाने का नहीं लोगो की जान बचाने का है।

प्रदेश में होली (१० मार्च) के समय 12000 लोग बाहर गए थे जो होली के बाद बिना किसी जाँच पड़ताल के लौटे है। होली के बाद लौटे अधिकतर रसूखदारों ने पुलिस को सूचना नहीं दी है। इनमे कोई मौजूदा मंत्री का करीबी है तो पूर्व मंत्री का। रसूख के दम पर उनमे अधिकतर गायब है। रोहणीपुरम की मरीज भूपेश सरकार में प्रभावशाली अधिकारी की बेटी होने से तीन दिनों तक घर में रही, बाद में स्थानीय विधायकों के दबाव बनाने पर उसे एम्स ले जाया गया था। बाहर से लौटे रसूखदारों और जमातियों पर सरकार सही समय पर अंकुश लगाती तो कोरोना से प्रदेश के पांच जिले संक्रमित नहीं होते।

प्रदेश के 75 से ८० हजार लोग होम क्वारंटीन में है, इनमे सिर्फ 3300 लोगो की जाँच की गई है। इन सबकी की जाँच करने पर कोरोना का आकंड़ा बढ़ना तय है। सरकार सिर्फ तीन हजार लोगो की जाँच कर खुश है। वही दिल्ली के निजामुद्दीन से मानव बम बनकर लौटे 159 जमातियों को क्वारंटीन करने निर्देशित किया गया। जिसमे सरकार ने सिर्फ 107 लोगो को ही ट्रेस कर सकी है बाकी के 52 गायब है। सरकार उस सूचि को ही गलत ठहराने में जुटी है जिसे केंद्र ने छत्तीसगढ़ सरकार को जारी किया था। सरकार नाममात्र मरीज मिलने से ख़ुशी मनाती रही और कोरोना बम बनकर जमाती दावते उड़ाते रहे। इसके बाद भी सरकार ने उन 52 जमातियों की सुध नहीं ली है, जिसके बाद उच्च न्यायालय को 13 अप्रेल तक उनका पता लगाने कहा है।

उसके बाद भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जमातियों की संख्या सिर्फ 107 ही बता रहे है, ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कोर्ट सही या प्रदेश के मुख्यमंत्री? विपक्षी पार्टियों के जमातियों को सरकार द्वारा बचाने के आरोप अगर सही होता है तो ऐसे में छत्तीसगढ़वासियो को कोरोना मरीजों की संख्या सैकड़ा पार करने पर आश्चर्य नहीं होना होगा।

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