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क्लब संचालको के रसूख के आगे के प्रशासन “बौना”, कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति.. अब तक नहीं हुआ लाइसेंस निरस्त

रायपुर, 17 अक्टूबर–  नशीली पार्टी का अड्डा बने क्वींस क्लब और उसके संचालको के रसूख के आगे प्रशासन बौना साबित हो रहा है। क्लब और बार संचालक द्वारा जवाब देने के बाद भी विभाग कार्यवाही की बजाये परिक्षण कर रहा है।

क्वींस क्लब में लॉकडाउन के दौरान क्लब संचालन होने, शराब पिलाने के बाद आबकारी विभाग ने बार संचालक को लाइसेंस निरस्त करने को लेकर पत्र लिखकर एक सप्ताह में जवाब माँगा था। संचालक द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं देने के बाद भी आबकारी विभाग ने कार्यवाही नहीं की है। आबकारी विभाग के सचिव पंद्रह दिनों बाद भी परिक्षण करने की बात कह रहे है। शराब कोचिये और शराबियो को पकड़ कर केस और जब्ती बनाने वाले आबकारी विभाग इस मामले कार्यवाही से बच रहा है। विभाग के अफसरों के सामने लॉकडाउन में क्लब में शराब परोसी गई तब भी अधिकारी अनभिज्ञ बने रहे। अब मामला स्पष्ट होने के बाद ही अधिकारियो ने मौन साध लिया है। है। विभाग के सचिव निरंजन दास ने कहा कि

“प्रकरण का परिक्षण कर रहे है, फिर कार्यवाही होगी।”

सचिव के बयान के बाद स्पष्ट होता है की आबकारी विभाग कार्यवाही की बजाये रसूखदार कारोबारी और उसके क्लब को बचाने में लगे है।

उधर हाउसिंग बोर्ड ने क्लब के लीजधारी हरबक्श बत्रा को फिर एक सप्ताह का और समय दिया है। बोर्ड द्वारा दिए दस दिनों के समय सीमा समाप्त होने के बाद बत्रा ने बोर्ड से जवाब देने डेढ़ महीने का समय माँगा था जिसे बोर्ड ने अस्वीकारते हुए एक सप्ताह का और समय दिया है। हाउसिंग बोर्ड भी क्लब पर कार्यवाही के नाम पर औपचारिकता निभा रहा है। बोर्ड को पुलिस ने मांगी जानकारी उपलब्ध करा दिया है जिसमे बत्रा द्वारा लीज नियमो का उल्लंघन का मिनाली सिंघानिया,चंपालाल जैन, हर्षित जैन और नेहा जैन को सबलीज पर दिया गया है। उसके बाद भी बोर्ड लीज अनुबंध कैंसिल करने की बजाये बार बार समय दे रहा है।

 

 

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