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EXCLUSIVE अपात्रो की नियुक्ति का गढ़ ‘कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय’ फर्जी दस्तावेजों से बने स्टेनोग्राफर और लिपिक, पढ़े फर्जीवाड़ा की पूरी कहानी

राहुल गोस्वामी

रायपुर (27 मार्च 2021)  प्रदेश के सबसे चर्चित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में नियुक्तियों में बड़ा घपला किया गया है। तत्कालीन कुलपति और कुलसचिव ने नियमो को ताक में रखकर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को विश्वविद्यालय के विभिन्न पदों पर नियुक्त कर दिया। विश्वविद्यालय में वर्ष 2008 चपरासी, वाहन चालक, लिपिक, सहायक ग्रेड तीन, भृत्य, चौकीदार और वर्ष 2010 में स्टोनों के विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की गई जिसमे विश्वविद्यालय प्रबंधन ने विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियुक्त कर दिया जिनमें अधिकतर के दस्तावेज फर्जी है।

विज्ञापन निकला, आवेदन भी आये पर सब अपात्र!

वर्ष 2008 में विश्वविद्यालय में सेटअप के अनुसार पहली बार चपरासी, वाहन चालक, लिपिक, सहायक ग्रेड तीन, भृत्य, चौकीदार और वर्ष 2010 में स्टोनों नियुक्तियां हुई जिसमे तत्कालीन कुलपति सच्चिदानंद जोशी और कुलसचिव देवेंद्र नाथ वर्मा ने नियमो को धता बताकर पूर्व से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को ही नियुक्त कर दिया। सूचना के अधिकार से मिले दस्तावेज बताते है कि इन पदों में नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने विज्ञापन निकाला और मिले सभी आवेदनों में सिर्फ पूर्व से कार्यरतकर्मियों के आवेदन के ही सही पाए गए जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उन्हें नियुक्ति आदेश जारी कर दिया।

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इनकी हुई नियुक्ति-

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने चौकीदार के लिए सागर कुमार बैस, भृत्य के लिए नारायण जगत, अरुण कुमार वर्मा, हरीकृष्णा नेताम, टीकम लाल साहू, तिलक चंद्राकर, कमल प्रसाद मरकाम और आदित्य वर्मा की नियुक्ति की गई। ये सभी विश्वविद्यालय में बतौर दैनिक वेतन भोगी कार्यरत थे जिन्हे रेगुलर नियुक्त किया गया। वही वाहन चालक के लिए शंकर निषाद, सहायक ग्रेड तीन लिपिक के लिए चंद्रशेखर शिवहरे, स्टोनोंग्राफर में अविनाश कार्डेकर और सुरजीत कंवर की नियुक्ति की गई। अविनाश कार्डेकर और चंद्रशेखर शिवहरे दोनों ही मूलतः मध्यप्रदेश के निवासी है, दोनों ने नियुक्ति के लिए छत्तीगगढ का निवास प्रमाण पत्र क्रमशः रायपुर और दुर्ग जिले से बनवाया जो फर्जी है। जब इनके छत्तीसगढ निवास प्रमाण पत्र की पड़ताल तहसील कार्यालयो में की गई तो दोनों ही फर्जी पाये गए। वही सुरजीत कंवर के पास आवश्यक अनुभव नहीं होने के बाद भी नियुक्ति दी गई।

तत्कालीन कुलपति सच्चिदानंद जोशी और कुलसचिव देवेंद्रनाथ वर्मा नियमो को दरकिनार कर पूर्व परिचित और अपात्रो को नियुक्त किया जिसका असर विश्वविद्यालय में नजर आता है। शैक्षणिक पदों पर हुई नियुक्ति में भी बड़ी गड़बड़ी की चर्चा है जो आने वाले दिनों में सामने आ सकते है। नियुक्ति में हुई गड़बड़ी पर उच्च शिक्षा सचिव धनंजय देवांगन ने कहा कि

“गड़बड़ी की जानकारी नहीं है अगर शिकायते मिलेगी तो जाँच कराएँगे।”

 

शिक्षा सचिव का आदेश दरकिनार…. महीनो बाद प्रबंधन ने नहीं दिया जवाब, नियुक्ति में फर्जीवाड़े पर घिरा विश्वविद्यालय प्रबंधन

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