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जाँच को प्रभावित करने अधिकारियो ने दस्तावेजों में की त्रुटी, सचिव को किया गुमराह.. वर्षो से लंबित आधा दर्जन जाँच

रायपुर– संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में वर्षों से जारी घोटालों की  जांच अब तक पूरी नहीं हुई है। अधिकारियो ने अनियमितता करने वाले अफसर को बचाने दस्तावेजों में छेड़छाड़ की है ताकि जांच का दायरा बढ़ जाए और घोटालेबाज अफसर पर कार्यवाही ना हो सके।

संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में  दर्जनभर से अधिक मामले है जिनकी जांच वर्षों से पेंडिंग है। जिसमें पुरखौती मुक्तांगन टिकट घोटाला, पुरखौती मुक्तांगन में मुरम मिट्टी सप्लाई घोटाला, संग्रहालयों का सत्यापन, तरीघाट संगोष्टी में घोटाला और सरकारी पैसों को निजी खाते में ट्रांसफर करने के मामले में आज तक ना पूरी जांच हो सकी है और जांच के अभाव में ना कोई कार्यवाही। विभाग में पदस्थ अधिकारियो के लिए विभाग चारागाह बना हुआ है, अधिकारी करोड़ों रुपए की गड़बड़ी करते है पर ना जांच होती है ना कोई कार्यवाही। शिकायत पर मंत्रालय के अफसर अपने है अफसर को गुमराह करते हुए ग़लत जानकारी देते है जिससे जांच का दायरा बढ़ जाता है और घोटालेबाज अफसर बच जाता है।

संग्रहालय का सत्यापन

बीते दिनों संस्कृति विभाग के सचिव ने संग्रहालयों का भौतिक सत्यापन करने आदेश जारी किया तो मंत्रालय में लम्बे समय से पदस्थ अधिकारियो ने गुमराह करते हुए ऐसे लोगो को शामिल किया जो सत्यापन में शामिल ही नहीं हो सकते। अधिकारियो ने विभागीय सचिव को को गुमराह करते हुए भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के एक अधिकारी और दस साल पूर्व सेवानिवृत हुए उपसंचालक को बिना अनुमति के शामिल किया। वही संचनालय से एक उपसंचालक को सत्यापन कमेटी में शामिल किया पर उसके नाम का उल्लेख नहीं किया। जिससे ये कितय नहीं हो सका कि किसे शामिल किया जाए। ऐसे में सत्यापन होना संभव नहीं है। संग्रहालयों की जांच बीते 15 वर्षों से नहीं हुई है, ऐसे में संग्रहालय की बेहद कीमती वस्तुओं की जानकारी विभाग किसी भी अधिकारी को नहीं है। वहीं वर्ष 2005 के बाद प्रदेश में आधा दर्जन स्थानों में खुदाई की गई जहा से कीमती पत्थर, सिक्के, मूर्तियां निकली। वे सब कहा है किसी को इसकी जानकारी नहीं है।

पुरखौती मुक्तांगन में टिकट घोटाला

भौतिक सत्यापन के भांति ही साल भर पूर्व उजागर हुए पुरखौती मुक्तांगन के टिकट घोटाले के दौरान बनाई गई जाँच समिति में किया था। सामान्य प्रशासन विभाग की सचिव मेरी खेस ने चार सदस्यीय समिति बनाया था जिसमे संचालक अनिल कुमार साहू, द्रौपती जेसवानी उपसचिव संस्कृति विभाग के साथ एक- एक सदस्य चिप्स और और एनआईसी के शामिल किये गए थे। इस जांच समिति में संचालक अनिल कुमार साहू को अध्यक्ष बताया गया जिसे समिति की मुखिया ने गलत बताते हुए दोबारा आदेश जारी करने कहा था, पर साल भर गुजरने के बाद उसमे सुधार नहीं हो सका। इस दौरान संचालक अनिल साहू का ट्रांसफर हो गया है। वही समिति के अध्यक्ष ने चिप्स और एनआईसी को एक एक सदस्य जाँच समिति में शामिल करने सदस्यों का नाम पत्र लिख माँगा था जो आज पर्यन्त तक नहीं मिला है। वहीं इस घोटाले को संचनालय में किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं है। विभाग में पदस्थ अधिकारी गड़बड़ी और घोटाला करने वाले अफसर को बचाने हर तरह के तरकीब लगते है ताकि घोटालेबाज अफसर को बचाया जा सके। है

सरकारी पैसों को निजी खाते में ट्रांसफर

पूर्व संस्कृति मंत्री दयालदास बघेल के ओएसडी रहते एक अफसर ने विभाग के 17 लाख रुपयों को अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर आहरण कर लिया। उस पैसों को विभाग के खाते में ट्रांसफर करने विभाग ने संबंधित अधिकारी को कई पत्र लिखा पर आखरी जानकारी तक उक्त राशि जमा नहीं हुआ था। वहा भी उसे बचाने उच्चपदस्थ अधिकारियो ने जांच रिपोर्ट पूरी नहीं कि, जिससे गबन करन वाले अफसर पर दो साल बाद भी कार्यवाही नहीं हो पाई है।

संगोष्ठी में फर्जी बिल लगा लाखो की गड़बड़ी

कवर्धा के पास पचराही में सपन्न हुए संगोष्ठी में संस्कृती विभाग के अफसर ने कैटरिंग व्यवसाई, ट्रैवल्स एजेंसी का फर्जी बिल लगाकर लाखो का भुगतान अपने खाते में कर दिया। जांच हुई तो पूरी बिल ही फजी निकली, जिस एजेंसी का बिल लगा था उस फर्म संचालक को ही नहीं पता था। उसकी जांच हुई तो उपसंचालक स्तर के अधिकारी को दोषी पाया गया पर वर्षों गुजरने के बाद कार्यवाही की फाइल ठंडे बस्ते में दबी है। वहीं एक अधिकारी ने मुक्तागन में दोपहिया गाड़ियों के नंबर को ट्रैक्टर और ट्रक बता लाखो रुपए का फर्जी मुरम मिट्टी सप्लाई किया, जिसकी जांच पेंडिंग है।

विभाग के संचालक और सचिव बदलते रहे पर किसी ने जांच पूरी कर कार्यवाही नहीं की जिससे घोटालेबाज अफसरो का हौसला बुलंद होता गया।

 

मुक्तांगन घोटाले की जाँच साल भर बाद भी अधूरी, आरोपी को बचाने दस्तावेजों में की गड़बड़ी,, शिकायतकर्ता को किया बर्खास्त

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