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अखबारों के विज्ञापनों में कटौती करेगी मोदी सरकार, विज्ञापन को लेकर नया प्रस्ताव बना रही सरकार… मीडिया पर सेंसरशिप की तैयारी में मोदी सरकार!

नई दिल्ली:  केंद्र सरकार समाचार पत्रो को दिए जाने वाले सरकारी विज्ञापनों को लेकर नया मसौदा तैयार कर रही है जिसके बाद देश भर के भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रो को विज्ञापन ज्यादा देकर अंग्रेजी अखबारों के विज्ञापनों में कटौती होगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि

मीडिया को लेकर नई स्ट्रैटजी बनानी होगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा प्रसार सुनिश्चित हो सके।”

 

भारतीय भाषाई अखबारों को होगा फायदा:

सूचना प्रसारण मंत्रालय के नए नियम से देश भर के भाषाई अखबारों को फायदा मिलेगा तो अंग्रेजी अखबारों को नुकसान होगा। नए नियम के बाद भारतीय भाषाओं के अखबारों को मूल विज्ञापन का 80% और गैर भारतीय भाषाई अखबारों की सिर्फ 20%विज्ञापन ही मिलेगा। ऐसे में अंग्रेजी के अखबारों को सीधा नुकसान होगा। वहीं इस नियम से बोडो, डोगरी,कश्मीरी, खासी, कोंकणी, मैथिली और गढ़वाली जैसे भारतीय भाषाओं को भी समान अवसर मिलेगा।

श्रेणियों में बांटा गया:

सरकार ने अखबारों की उनके प्रसार संख्या के अनुपात से श्रेणियों में विभाजित किया है। जिसके बाद नई विज्ञापन नीति से 25000 प्रसार संख्या वाले समाचार पत्र छोटे, 25 से 75000 प्रतियों वाले माध्यम और 75000 से प्रतियों से ऊपर समाचार पत्र बड़े समाचार पत्र की श्रेणी में रखे गए है। जिसके बाद छोटे समाचार पत्र को 15फीसदी, माध्यम श्रेणी को 35फीसदी और बड़े समाचार पत्रों को 50फीसदी तक का विज्ञापन मिलेगा।

मीडिया पर दबाव बनाने की कोशिश!

सरकार के नए कानून से अंग्रेजी अखबारों को सीधा नुकसान होगा। जानकारी की माने तो सरकार के नए नियम अंग्रेजी अखबारों पर अंकुश लगाने लाया गया है। अंग्रेजी अखबारों ने केंद्र सरकार के विरोध के अखबारों को प्रमुखता से प्रकाशित कर रहे है, जिसके चलते बीते दिनों एक अंग्रेजी अखबार को सरकार ने विज्ञापन देने से मना कर दिया था। वहीं एक अंग्रेजी अखबार को बीते 25 साल के लीज राशि एक साथ जमा करने का फरमान जारी कर दिया था। वहीं देश में बढ़ते अखबारों की संख्या को देखते सरकार ने उनकी श्रेणियों में बांट दिया है।

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