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पुलिस के नोटिस के बाद भी नहीं पहुंची डॉक्टर, दोबारा नोटिस की तैयारी.. शिकायतकर्ता ने पुलिस की निष्पक्षता पर उठाये सवाल।

रायपुर– डॉक्टर द्वारा सरकारी पैसो में गबन मामले में विभाग के अधिकारी मामले की लीपापोती में जुटे है वही इसमें रोज नए तथ्य सामने आ रहा है। शिकायतकर्ता एस संतोष ने तत्कालीन सीएमएचओ डॉ मधुलिका सिंह द्वारा सरकारी पैसो का गबन और पद की दुरूपयोग करने की शिकायत बिलासपुर के सरकंडा थाने में जनवरी में किया था जिसमे पुलिस ने सीएमएचओ कार्यालय को पत्र लिख जानकारी माँगा था, वही डॉक्टर मधुलिका सिंह को बयान के लिए नोटिस जारी कर सरकंडा पुलिस थाना बुलाया था।

पुलिस द्वारा नोटिस के बाद भी डॉक्टर सिंह थाना नहीं पहुंची। जिसके बाद पुलिस ने बयान लेने दोबारा नोटिस जारी करने जहमत नहीं उठाया। अब मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस दोबारा नोटिस जारी करने की बाते कर रही है।

वही पुलिस इस मामले में पुलिस की कार्यवाही सवालो के घेरे में है। पुलिस ने विगत 13 जनवरी 2020 को सीएमएचओ कार्यालय को पत्र लिख शिकायत के संबंध में दस्तावेज मांगे थे जिसमे सीएमएचओ कार्यालय द्वारा दिनांक 25 जनवरी 2020 को सरकंडा पुलिस को मौजूद दस्तावेज की जानकारी सत्यापित प्रति के साथ दिया था। जिसे पुलिस ने साफ़ तौर पर इंकार किया की पुलिस को सीएमएचओ कार्यालय द्वारा कोई भी दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराया गया। वही इस मामले में जनहित याचिका लगाने वाले एस संतोष कुमार ने कहा कि दस्तावेज देने के बाद एफआईआर नहीं होने का कारण पूछा तो एसपी ने कि

आप इतना पर्सनल इंट्रेस्ट क्यों ले रहे। आपने शिकायत कर दिया अब पुलिस कार्यवाही करेगी।”

सीएम की करीबी का धौस

डॉ मधुलिका सिंह द्वारा जारी वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक तानाशाही से बिलासपुर के डॉक्टर, कार्यालीन स्टाफ परेशान है। इसकी शिकायत पूर्व की बीजेपी सरकार मे भी की गई थी पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के रिश्तेदार होने के चलते कोई भी अधिकारी कार्यवाही की हिम्मत नहीं कर सका। जिससे लगातार भ्रष्टाचार का सिलसिला चलता रहा जो अब तक जारी है।

अवमानना और कम्प्लेंन केस की तैयारी

उच्च न्यायालय द्वारा एफआईआर के आदेश के बाद भी सरकंडा पुलिस एफआईआर नहीं कर पाई है। जिसके बाद पर अब अवमानना याचिका लगाई जाएगी। शिकायतकर्ता एस सतोष कुमार ने कहा कि

सभी दस्तावेज देने के बाद पुलिस कार्यवाही नहीं करते हुए गबन की आरोपी डॉक्टर को सरंक्षण देते हुए कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है। कार्यवाही की जानकारी लेने पर एसपी पर्सनल इंट्रेस्ट पूछते है, ऐसे में पुलिस की कार्यवाही निष्पक्ष नहीं प्रतीत होती। गबन किया गया पैसा सरकारी आम जनता के टैक्स का था, इसमें पर्सनल इंट्रेस्ट का सवाल नहीं उठता। ऐसे में कोर्ट की अवमानना और सम्बंधित पुलिस अफसरों के खिलाफ कम्प्लेन केस फाइल की जायेगी।”

वही सरकंडा थाना प्रभारी राजेश रात्रे ने कहा कि

डॉक्टर को नोटिस जारी कर बयान के लिए बुलाया गया था, तब डॉक्टर नहीं आई। फिर लॉक डाउन हो गया तो कार्यवाही नहीं हो सकी, अब दोबारा नोटिस जारी करेंगे।”

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