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सत्यापन के पूर्व चार्ज को लेकर सिर फुट्टौवल, दस वर्षो से नहीं दिया चार्ज.. संचालक ने जारी किया नोटिस, उधर सत्यापन में फर्जीवाड़े की आशंका!

रायपुर– संस्कृति विभाग के सचिव ने प्रदेश के महंत घासीदास संग्रहालय रायपुर और जगदलपुर के संग्रहालय का भौतिक सत्यापन करने का आदेश जारी है। जिसके अनुसार दो महीने के भीतर दोनों ही संग्रहालयों का भौतिक सत्यापन किया जाना है। सत्यापन के पूर्व चार्ज देने को लेकर विभाग में सिर फुट्टोवल की स्थिति है।

जानकारिनुसार राजधानी के महंत घासीदास संग्रहालय का चार्ज वर्तमान में संग्रहाध्यक्ष पीसी पारख के पास है वही जगदलपुर के संग्रहालय का चार्ज अमृतलाल पैकरा को दिया गया है। दस्तावेजों के अनुसार बीते दस सालो से इन दोनों ही संग्रहालयों का चार्ज उपसंचालक जगदेव राम भगत के पास है जिन्होंने विगत दस वर्षो के बाद भी आज तक पूरी जानकारी के साथ संग्रहालयों का चार्ज अन्य अधिकारियो को नहीं दिया है। जिसे लेकर संचालक ने उपसंचालक जगदेवराम भगत को नोटिस जारी है।

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चार्ज देने के लिए संचालक एके तोपनो ने उपसंचालक भगत को विगत 15 दिनों में दो बार नोटिस जारी किया है उसके बाद भी उपसंचालक चार्ज देने को तैयार नहीं है। चार्ज नहीं देने पर संग्रहालयों का सत्यापन नहीं हो पायेगा।

वर्षो से चार्ज नहीं दिया-

महंत घासीदास संग्रहालय में मौजूद कीमती पुरातात्विक वस्तुओं को लेकर उहापोह की स्थिति है। पूर्व में उपसंचालक रहे एसएस यादव के सेवानिवृत होने के बाद महंत घासीदास संग्रहालय का चार्ज उपसंचालक जगदेवराम भगत को दिया था। जिसके बाद वन विभाग से प्रतिनियुक्ति पर संस्कृति विभाग में आए पीसी पारख को नियम विरुद्ध संग्रहाध्यक्ष बनाया गया। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई तो कोर्ट ने पीसी पारख को झटका देते नियुक्ति को अवैध बताया। हाईकोर्ट के फैसले को तत्कालीन बीजेपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जहा मामला लंबित है। तब से लेकर आज तक उपसंचालक जगदेवराम भगत ने संग्रहालयों का चार्ज नहीं दिया है।

जिससे संग्रहालय में मौजूद पुरातात्विक सम्पदाओं की जानकारी किसी को नहीं है। वही उसके चलते विगत 15 वर्षो से संग्रहालयों का सत्यापन नहीं हो सका है।

सत्यापन में फर्जीवाड़े की साजिश-

विगत 15 वर्षो के बाद संस्कृति सचिव ने सत्यापन का साहस पूर्ण आदेश जारी है उससे उम्मीदे है की सत्यापन समय पर पूर्ण हो जायेगा। संग्रहालय के सत्यापन पर फर्जीवाड़े की आशंका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार 2005 के बाद हुए खनन में मिले बेशकीमती पुरातात्विक सिक्के, मुर्तिया और कीमती पत्थर गायब है, जिन्हे रिकॉर्ड के साथ संग्रहालय में होना था पर वे वहा नहीं है। कहा है किसी को नहीं पता है। ऐसे में सत्यापन में फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है।

संस्कृति विभाग के संचालक एके तोपनो ने कहा कि

चार्ज देने संबंधी नोटिस उपसंचालक को जारी किया गया है, चार्ज देने के बाद तुरंत सत्यापन किया जायेगा।”

 

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