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EXCLUSIVE संग्रहालयों का सत्यापन करने 15 सालों बाद जारी हुआ आदेश, उसमे में गंभीर त्रुटी,, नहीं हो सकेगा सत्यापन!

राहुल गोस्वामी@Theindipendent.Com

रायपुर- संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने संग्रहालयों के भौतिक सत्यापन करने का आदेश जारी किया है। प्रदेश के सबसे पुराने महंत घासीदास संग्रहालय रायपुर, क्षेत्रीय मानव विज्ञान संग्रहालय का बीते 15 वर्षो से भौतिक सत्यापन नहीं हुआ है, जिसे लेकर लेकर Theindipendent.com ने प्रमुखता से खबरे प्रकाशित किया था।

जिसके बाद सचिव संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग अलबगन पी ने दो महीने के भीतर दोनों ही संग्रहालयों का भौतिक सत्यापन करने का आदेश जारी किया है। सचिव ने इसके लिए चार सदस्यों की कमेटी बनाया है जो दो महीने के भीतर दोनों ही संग्रहालय का भौतिक सत्यापन करेगी। कमेटी में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के उपसचिव, संचनालय संस्कृति विभाग के एक उपसंचालक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सदस्य और संस्कृति विभाग के पूर्व उपसंचालक को शामिल किया गया है।

सचिव द्वारा जारी आदेश में गंभीर त्रुटी सामने आई है। मंत्रालय से जारी आदेश मे जिन सदस्यों को भौतिक सत्यापन कमेटी में शामिल किया गया उनसे पूछा ही नहीं गया गया है। संबंधितो से पूछे बिना आदेश जारी करने से सत्यापन होने की संभावना कम है। भौतिक सत्यापन कमेटी में शामिल सचिव राहुल वेंकट का ट्रांसफर दूसरे विभाग में हो गया है वही दस साल पूर्व रिटायर हुए उपसंचालक एसएस यादव को पता ही नहीं है की उन्हें उक्त कमेटी में शामिल किया गया है। वही विभाग ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के एक अधिकारी को टीम में शामिल किया है। विभाग द्वारा जारी किया आदेश की स्थिति के अनुसार भौतिक सत्यापन नहीं हो पायेगा। भौतिक सत्यापन कमेटी के सदस्य पूर्व उपसंचालक एसएस यादव ने कहा

बिना उनसे बातचीत किये विभाग ने आदेश जारी किया, कमेटी में शामिल करने के पुर्व एक मुझसे पूछा जाना था। मेरा दस पहले रिटायरमेंट हो चूका है।”

 

आखरी बार 2005 में हुआ था सत्यापन-

संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा प्रदेश के संग्रहालयों का सत्यापन आखरी बार वर्ष 2005 में हुआ था उसके बाद से अब तक किसी भी संग्रहालय का सत्यापन नहीं हो सका है। वर्ष 2005 के बाद से विगत 15 सालो में विभाग में दस से ज्यादा संचालक बदल गए पर किसी ने भी सत्यापन नहीं कराया। जिसके चलते संग्रहालयों में रखे बेहद कीमती पुरातात्विक सिक्के, मूर्तियों, वस्तुओं की जानकारी विभाग के साथ किसी को भी नहीं है।

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प्रत्येक वर्ष होना है सत्यापन-

भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के नियमानुसार देश के सभी संग्रहालयों का भौतिक सत्यापन प्रत्येक वर्ष करने का प्रावधान है। सत्यापन नहीं होना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। सत्यापन होने से सग्रहालय में मौजूद वस्तुओं की जानकारी मिलती है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता है। पूर्व संचालक रहे अनिल कुमार साहू ने अगस्त 2019 में सत्यापन कराने आदेश जारी किया था पर उसका पालन नहीं हो सका। भौतिक सत्यापन के लिए जारी आदेश को लेकर संस्कृति विभाग के संचालक अमृत कुमार तोपनो ने कहा कि

“आदेश सचिव साहब ने जारी किया था, इसके बारे में वे ही बता सकते है।

सचिव संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने अलबगन पी से बात करने करने कोशिश की गई पर उनके फोन में लगातार घंटी जाती रही।

 

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