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विशेष- ये है राजधानी जहा अर्थी तो मिल जाएगी पर दवाई इंजेक्शन नहीं, यहाँ एक जान की कीमत है चार लाख.. लाचार और बेबस स्वास्थ्य महकमा!

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रायपुर (22 अप्रैल 2021)  राजधानी सहित पुरे प्रदेश में कोरोना से हाहाकार मचा हुआ है। राजधानी में संक्रमितों को ईलाज नहीं मिल रहा, मरीजों को अस्पतालों में बिस्तर नहीं मिल रहा पर आसानी से आपको अंतिम संस्कार के अर्थी,बांस और जलाने के लिए पैरा मिल जायेगा। ये हाल है राजधानी रायपुर का जहा मरीजों को सरकारी तो छोडो निजी अस्पतालों में बिस्तर नसीब नहीं हो रहा। उन्हें ऑक्सीजन के लिए भटकना पड़ रहा और रेडमेसिविर इंजेक्शन के लिए सुबह 3 बजे से रेडक्रॉस के बाहर जमा हजारो की भीड़ में सिर्फ चुनिंदा लोगो को मिल रहा।

ये सब हो रहा सरकार के नाक के नीचे जहा स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी और खुद मंत्री रहते है। जब राजधानी का ऐसा हाल है तो दूरस्थ जिलों का अंदाजा लगाया जा सकता है। यहाँ आसानी से अंतिम संस्कार की समाग्री आपको मिल जाएगी और सबसे सुलभ यही है। ऐसे में शर्म आनी चाहिए उन हुक्मरानो को जो स्वास्थ्य और सेहत पर बड़ी बड़ी बाते करते है।

सरकारी रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में बीते दस दिनों में करीब 1000 हजार लोगो ने जान गवाई। लोग हाथो में पैसे लेकर अस्पतालों में ईलाज तलाश रहे, उसके बाद भी उन्हें मायूसी ही मिल रही। तीन दिन पहले एक महिला की मौत हो गई, अस्पताल ने शव देने से मना किया। झगडे और परिजनों को गुस्से को देख अस्पताल ने शव दे दिया पर एम्बुलेंस नहीं दी, तो स्ट्रेचर में शव ढोना पड़ा। मानवता को शर्मसार करने वाली व्यवस्था से क्या आपका उनका दिल नहीं पसीजता जो कोविद सेंटर्स को भी प्रचार का अड्डा बनाये हुए है। निजी अस्पतालो में खुलेआम लोगो से सौदेबाजी हो रही, अस्पताल ईलाज कम पैसे कमाने का जरिया बना हुआ है।

अस्पताल प्रबधन सरकार की खूबचंद बघेल, आयुष्मान योजना और मुख्यमत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मरीजों को नहीं दे रहे । लोगो को इंश्योरेंस का लाभ नहीं मिल रहा और स्वास्थ्य मंत्री कोप भवन में है। सबसे सुलझे हुए और संवेदनशील समझे जाने वाले स्वास्थ्य मंत्री जी ऐसी भी क्या नाराजगी की प्रतिदिन सैकड़ो लोग मर रहे और आप मूकदर्शक बने हुए है। राजधानी का नाम बदनाम करते अस्पताल में छ मरीजों को मौत हो गई, लोग जिन्दा जल गए और कार्यवाही के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही। क्या एक जान की कीमत सिर्फ चार लाख रुपये है ? आखिर इतना बेबस और लाचार कैसे हो स्वास्थ्य महकमा, कहा गई संवेदनशीलता?

 

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